हरिवंश राय बच्चन की जयंती पर विशेष

देवघर : आज सम्पूर्ण काव्य व साहित्य जगत में हरिवंश राय बच्चन की 113वीं जयंती मनाई जा रही है। मौके पर विवेकानंद शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं क्रीड़ा संस्थान के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ. प्रदीप कुमार सिंह देव ने कहा- डॉ. हरिवंश राय बच्चन एक उच्च कोटि के कवि थे जिनकी काव्यशैली वर्तमान समय में भी हर आयु के लोगों को प्रभावित करती है। बच्चन जी का जन्म 27 नवंबर 1907 के दिन बापूपट्टी गाँव, जिला प्रतापगढ़ में हुआ था। उनकी प्रसिद्ध रचना “मधुशाला” आज भी श्रोताओं का मन मोह लेती है।

अपने दौर के श्रेष्ठतम कवि बच्चन जी कविता और लेखन योगदान के लिए पद्म भूषण विजेता भी बने। उन्होने अपनी प्राथमिक शिक्षा जिला परिषद प्राथमिक स्कूल से सम्पन्न की थी। उसके बाद वह कायस्थ पाठशाला से आगे का अध्ययन करने के लिए जुड़े, जहां उन्होने अपनी खानदानी परंपरा आगे बढ़ाते हुए उर्दू का अभ्यास किया।

बच्चन जी की पहली शादी श्यामा देवी से हुई थी। श्यामा देवी को 24 वर्ष की आयु में टीबी रोग नें घेर लिया एवं वर्ष 1936 में उनकी अकाल मृत्यु हो गयी। वर्ष 1941 में बच्चन जी का दूसरा विवाह तेजी बच्चन से हुआ।

और उन दोनों की दो संतान हुईं- अमिताभ और अजिताभ। हरिवंश राय की प्रसिद्ध रचना –कोशिश करने वालों की कभी हार नही होती, लहरों से डरकर नौका कभी पार नहीं होती, कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती। नन्ही चीटी जब दाना लेकर चलती है, चढ़ती दीवारों पर सौ बार फिसलती है, मन का विश्वास रगों में साहस भरते जाता है, चढ़ कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है, आखिर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती, कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती। उनकी मृत्यु 18 जनवरी, 2003 को हुई। वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं, परन्तु साहित्य एवं काव्य जगत में अमर हैं।

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