मोतिहारी: बिहार के सरकारी स्कूलों की तस्वीरें बदलने लगी है। वर्तमान समय मे शिक्षा विभाग द्वारा किए जा रहे बेहतर प्रयोग से छात्र-छात्राओं की उपस्थिति विद्यालय मे बढ़ने लगी है। उक्त बातें मृत्युंजय ठाकुर(शिक्षक) नवसृजित प्राथमिक विद्यालय खुटौना यादव टोला, पताही, पूर्वी चम्पारण -सह- प्रदेश मीडिया संयोजक टीचर्स ऑफ बिहार ने कही है। उन्होने कहा कि बच्चें विद्यालय मे हो रहे नवाचारी गतिविधि से शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।

 

इस नवाचारी गतिविधि को सभी विद्यालयों तक पहुंचाने के लिए बिहार की सबसे बड़ी प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी टीचर्स ऑफ बिहार द्वारा विगत तीन वर्षों से लगातार काम किया जा रहा है। जिसका असर अब बिहार राज्य के सभी विद्यालयों मे देखने को मिल रहा है। उन्होने कहा कि टीचर्स ऑफ बिहार एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जहां बिहार के सरकारी विद्यालय के एक से बढ़कर एक उत्कृष्ट शिक्षक बिहार के सरकारी स्कूलों की दशा और दिशा बदलने के लिए निःस्वार्थ भाव से काम कर रहे है।
प्रतिदिन हो रहे नवाचारी गतिविधि से विद्यालय मे बच्चों की बढ़ती उपस्थिति मील का पत्थर साबित हो रहा है। शिक्षा विभाग, बिहार की अबतक की सबसे महत्वकांक्षी योजना चहक ने बच्चों की शैक्षिक, व्यवहारिक एवं मनोवैज्ञानिक कौशल को संवारने का एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म मुहैया कराया है।

 

वर्तमान मे विद्यालयों मे प्रतिदिन चहक गतिविधियां करायी जा रही है। जिससे बच्चों मे सर्वांगीण विकास की अवधारणा विकसित हो रही है। प्राथमिक कक्षा मे अध्ययनरत छात्रों के लिए सभी विद्यालयों को निपुण भारत मिशन अंतर्गत बुनियादी साक्षरता एवं संख्या ज्ञान के लिए फाउंडेशन लिटरेसी एवं न्युमरेसी अर्थात एफ.एल.एन किट मुहैया करवाया गया है। जिससे बच्चों मे शिक्षा के प्रारंभिक वर्षों मे भाषा और गणित कौशल का निर्माण करने मे मदद मिल रही है।
मृत्युंजय ठाकुर ने कहा कि इन सभी नवाचारों से न केवल छात्रों बल्कि शिक्षकों को भी नवाचारी गतिविधि आधारित शिक्षण का अवसर मिल रहा है। जिससे छात्र बेहतर ढंग से लाभान्वित हो रहे हैं।

 

उन्होने कहा कि पूर्व मे भी ” शिक्षक-अभिभावक ” संगोष्ठी का चलन रहा है किन्तु शिक्षा विभाग द्वारा निर्देशित ” अभिभावक-शिक्षक ” संगोष्ठी के लगातार आयोजन ने शिक्षक और अभिभावक को और निकट/नजदीक लाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यूं कहे कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा अभिभावकों के साथ संगोष्ठी कर छात्रों को बेहतर शिक्षा के लिए विद्यालय भेजने हेतु प्रेरित करने मे लगभग सफल हुए हैं।

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