सिमडेगा: जिला के जलडेगा प्रखंड में स्कुली बच्चों को नहीं मिल रहा है मिन्यू आधारित मध्यान्ह भोजन, शिक्षक मनमाने ढंग से कर रहें हैं मध्यान्ह भोजन का संचालन। मोनिटरिंग टीम जिम्मेवारी के नाम पर महज खानापूर्ति कर रही है। बच्चों के भोजन में कहीं अंडा गायब रहता है, तो कहीं मात्र दालभात या सब्जी भात ही दिया जाता है। ऐसा आज जलडेगा प्रखण्ड के आरसी प्राथमिक विद्यालय पतिअम्बा में बच्चों को खिचड़ी भात दिया गया वो भी जला भुना और भुखा बच्चा उसे चाव से खाने के लिए तैयार हैं। जबकी आज के मिन्यू में दाल भात सब्जी देना था।

मध्यान्ह भोजन के नाम पर धड़ल्ले से काटवा रहें जंगल, शिक्षक
प्रखण्ड में एमडीएम संचालन में शिक्षकों चलती है मर्जी, धुंआ रहित राज्य निर्माण के तहत सरकार सभी विद्यालयों में एलपीजी गैस कनेक्शन दिया गया है लेकिन मध्यान्ह भोजन पकाने में शिक्षक गैस के जगह पर लकड़ी का खुलेआम उपयोग कर रहे हैं। और बड़े पैमाने पर हो रहा जंगल का दोहन। रसोईया आज भी धुंऐ के लपटों में बना रही हैं भोजन।
प्रभारी एच एम वाल्टर सोरेंग ने कहा बिगत एक साल से एमडीएम में बुधवार को खिचड़ी खिला रहे हैं। हरा सब्जी नहीं मिलता है। आस- पास बज्रपात या मरा पेड़ खरीदी कर लकड़ी की ब्यवस्था की गई है। जितनी राशि मिलती है उससे गैस खरीदना संभव नहीं है। बीईईओ अरूण कुमार पाण्डे ने कहा जांच किया जाएगा।

बताते चले की बीईईओ अरुण कुमार पांडे को इस प्रतिनिधि द्वारा विगत दिनों से ही मामले से अवगत कराने का प्रयास किया जा रहा था,मगर साहब ने कोई जवाब नहीं दिया।यह भी कहा जा सकता है की गरीब बच्चों के निवाले पर न तो सरकार ईमानदार है और न ही विभाग।सभी मिलकर खानापूर्ति करने में लगे हुए हैं।केन्द्र सरकार के द्वारा भी कुपोषण मिटाने के लिए तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं, मगर मजाल है की यह गरीब बच्चों तक पहुचे।
एमडीएम पकाने के लिए गैस कनेक्शन दिया गया है।

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