डा आलोक कुशवाहा

कुढ़नी: गोपालगंज और मोकामा विधानसभा उपचुनाव परिणाम आ जाने के बाद कुढ़नी विधानसभा उप चुनाव की रणभेरी बज चुकी है। चुनाव आयोग ने जहां 10 नवंबर से 17 नवंबर तक नामांकन कार्य तथा 18 से 21नवंबर तक कागजी कार्यवाही जांच और नामांकन वापसी हो सकेगा। वहीं 5 सितंबर को चुनाव और 8 दिसंबर को चुनाव नतीजे घोषित होंगे।
कुढ़नी विधानसभा का गणित-कुढ़नी विधानसभा मुजफ्फरपुर जिले में स्थित है ।और यह मुजफ्फरपुर लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक जनसंख्या 435676 है। आबादी 100%ग्रामीण और 0% शहरी आबादी है। अनुसूचित जाति तथा जनजाति क्रमश:18.44और 0.07 है। कुढ़नी में 3लाख 11हजार से अधिक मतदाता है। यहां लगभग 320 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। कुढ़नी मे जहां दो दशक से अधिक भूमिहार वही 20 वर्ष तक कुशवाहा समाज ने प्रतिनिधित्व किया।

कुशवाहा सहित अन्य जातियों का समीकरण-
कुढ़नी में कुशवाहा, भूमिहार, मल्लाह, यादव वोटरों की संख्या अधिक है। वैश्य और मुसलमान प्रभावशाली है। दरअसल कुढ़नी विधानसभा में कुशवाहा वोटरों का वर्चस्व है। भूमिहार जाति से आने वाले साधुशरण चार बार यहा से विधायक बने। किन्तु कुढ़नी का राजनीतिक परिदृश्य व समीकरण नब्बे केदशक के बाद बदल गया। 1995 में भूमिहार जाति के बाहुबली सम्राट अशोक निर्दलीय चुनाव लङे वही लालू यादव की पार्टी से बसावन भगत जिसमे बसावन भगत की जीत हुई। बसावन भगत कुशवाहा जाति से आते है। 1995 के बाद 2000 मे भी जीते और मंत्री बने। 2005 के चुनाव समीकरण के बदलाव के कारण बसावन भगत मनोज कुशवाहा से 2900वोटो से हार गए। अभी भाजपा मे है और पार्टी की ओर से प्रबल दावेदार माने जा रहे है। बसावन भगत को विश्वास है कि पार्टी अगर टिकट देती है तो सभी समाज का वोट लेने में कामयाब होंगे।

 

महागठबंधन उम्मीदवार मनोज कुशवाहा-

मनोज कुशवाहा स्थानीय है। इनकी छवि साफ-सुथरी है। किसी भी प्रकार के आरोप-प्रत्यारोप से मुक्त रहें। इन्होंने फरवरी 2005 व अक्टूबर 2005 तथा 2010 अर्थात 2005 से 2015 तक कुढ़नी क्षेत्र से प्रतिनिधित्व किया। वर्ष 2015 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ गुप्ता 73 227 तथा मनोज कुशवाहा को 61657 वोट लाकर हार गए। 2020 के चुनाव में जदयू ने इन्हे कुढ़नी के बजाय मीनापुर विधानसभा से जदयू प्रत्याशी बनाया। किंतु वे कुढ़नी से चुनाव लड़ने के लिए अड़े रहे और अंतिम में मीनापुर से जदयू के सिंबल को वापस कर दिया। मनोज कुशवाहा अपने समरस और मृदुल स्वभाव के कारण क्षेत्र में काफी लोकप्रिय है। वे मंत्री और दस वर्ष तक विधायक रहते हुए इन्होंने अपने क्षेत्र में विकास कार्यों की गति दिया। अपने किए गए विकास कार्यों और जनता ऊपर मजबूती पकड़ तथा महागठबंधन के समीकरण के कारण अपनी जीत के प्रति सुनिश्चित है।

 

कुढ़नी मे उपचुनाव क्यो?
-वर्ष 2020 के चुनाव मे भाजपा विधायक केदार गुप्ता को हराकर अनिल सहनी राजद के टिकट पर कुढ़नी विधानसभा से विधायक बने। यहां बताते चले कि अनिल सहनी उत्तर बिहार के कद्दावर निषाद समाज के नेता महेंद्र सहनी के बेटे हैं। राजसभा सांसद महेंद्र सहनी के निधन के बाद अनिल सहनी राजसभा सांसद बने। इन्होंने राजसभा सांसद सदस्य रहते हुए बिना कोई यात्रा किए जाने की टिकट और फर्जी बोर्डिंग पास के जरिए 23 लाख 71 हजार के की धोखाधड़ी का आरोप है। सीबीआई ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट धोखाधड़ी सरकारी पद के दुरुपयोग धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। अनिल सहनी को टिकट घोटाले को लेकर दोषी ठहराए जाने के बाद इनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई। फलत: कुढ़नी विधानसभा उपचुनाव का कारण बना।

Leave a Reply

Your email address will not be published.