दिवाली: बनी रहे आप की मुस्कान, दीवाली मनाइए, लेकिन साथ ही कुछ एहतियात भी बरतें

उमेश कुमार सिंह
दिवाली हिंदुओं का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। दिवाली का त्योहार प्रकाश और उजाले का प्रतीक माना जाता है। इसे बड़ी ही खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है। दिवाली वैसे पांच दिनों का त्योहार माना जाता है। इस दिन घरों में दिवाली की परंपरा के अनुसार हम सभी लोग घर के हर कोने में चारों ओर दीपक और मोमबत्तियां जलाते हैं। सभी दोस्तों और रिश्तेदारों को मुबारकबाद देते हैं। धनतेरस, दीपावली, भैया दूज। जाहिर है दिवाली साल का सबसे बढ़ा त्यौहार है तो इसकी तैयारियां भी जोर शोर से ही होती है, भले ही वो पटाखे हो, मिठाइयाँ हो या फिर नए कपड़ो की खरीदारी। दिवाली पर हर कोई अपनों के चेहरों पर खुशी देखना चाहता है और हर वर्ष अपनों के साथ शुभ और सुरक्षित दिवाली मानाने की कामना करता है, परन्तु क्या इतना ही काफी है ? इस दिवाली आप अपना और अपने प्रियजनों की सेहत को ख्याल रखते हुई, छोटी छोटी सावधानी बरतकर इस दीवाली का दोगुना मजा उठा सकते हैं। दिवाली के दिन बड़े हो या छोटे हर कोई खुल कर एंजॉय करना चाहता है, लेकिन छोटे बच्चों को अपनी निगरानी में ही पटाखे जलाने दें। उन्हें ज्यादा धमाके व लाइटिंग वाले बम बिल्कुल न दें, क्योंकि इनसे जलने का डर रहता है। अगर आपके बच्चे की उम्र 7 साल से कम है, तो आप खुद उसका हाथ पकड़ कर फुलझड़ी जला सकते हैं। हर साल दिवाली मनाते हुए हजारो लोग जलने, आंखों की रोशनी जाने या फिर कानों के पर्दे फटने की समस्या का शिकार होते है। अगर डॉक्टर की माने तो दिवाली से जुडी दुर्घटनाओ में लगभग 85 प्रतिशत, 15 साल से कम उम्र के बच्चे और महिलायें होती है। आप दीवाली बेशक मनाइए, लेकिन साथ ही कुछ एहतियात भी बरतें। ताकि बम पटाखे जलाते वक्त आप किसी दुर्घटना के शिकार न हों। वैसे भी दीवाली पर किसी भी तरह की दुर्घटना हो सकती है। ऐसे में एतिहातन तौर पर आप फर्स्ट एड बॉक्स घर में जरूर तैयार रखें।
दिवाली से पहले बेहतर है कि आप पहले से तैयार रहें ताकि एन मौके पर आपको परेशानियों का सामना न करना पड़े। किट में ये सामान जरूर होना चाहिए सिल्वर सल्फाडाइजीन क्रीम, डिटॉल या सेवलॉन, जाली वाली पट्टी, पेन किलर, कॉटन, बैंडेज, एंटिसेप्टिक क्रीम, एंटिसेप्टिक साबुन, कुछ एंटिबायोटिक दवा, कैंची (सीजर), प्लास्टिक ट्विजर्स (प्लास्टिक का पतला-सा चिमटा) अगर घर पर किसी सदस्य को अस्थमा की शिकायत है तो इन्हेलेर्स किट मे अवश्य रखे आदि। प्राथमिक चिकित्सा के बाद जरुरी है डॉक्टर को दिखाया जाये। जले का घर पर खुद इलाज करने में खतरा यह है कि आप तय नहीं कर सकते कि कितने फीसदी जला है। चोट लग जाए तो बच्चे को डांटें नहीं, क्यूंकि ऐसा करने से बच्चा घबरा जायेगा। बच्चे को प्यार से पुचकारें और उसका साहस बढ़ाने का काम करें। सबसे पहले बच्चे की चोट को देखें और जरूरत के अनुसार उसका प्राथमिक इलाज करें। अगर जलने की चोट सामान्य है तो उस हिस्से को तब तक बहते हुए नल के पानी में रखें, जब तक जलन पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाए। फिर उस पर सिल्वरेक्स या बरनोल का लेप लगाएं। इसके बाद मरीज को जल्द से जल्द चिकित्सक को दिखाएं। चिकित्सक की सलाह के मुताबिक दवाओं का सेवन करें। डॉक्टर को अवश्य दिखाना चाहिए।
तेज पटाखे की आवाज कान के परदे और आंतो को फाड़ सकती है। वहीं कई मामलों में कान की नसें फटने के मामले भी सामने आयी है, जिससे सुनने की क्षमता जा सकती है। इसलिए अगर पटाखे तेज आवाज वाले हैं तो कान बंद कर लेना चाहिए। दीपावली में पटाखों के धुएं से प्रदूषण बढ़ जाता है और इससे टॉक्सिन भी अत्यधिक बढ़ जाते हैं। इन टॉक्सिनों की वजह से आंखों पर भी काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। आंखों में जलन और उससे पानी आने की समस्याओं में भी बढ़ोतरी होती है। इसलिए आंखों का खास ध्यान रखें। बाहर से आने के बाद अपनी आंखों को साफ पानी से अच्छी तरह छींटे मारकर धो लें। अगर आंख में पटाखों से या किसी अन्य तरह से जख्म आ जाए तो खुद साफ या ठीक करने की बजाए तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से संपर्क करें। नेत्र विशेषज्ञ का कहना है कि किसी भी आंख की चोट को मामूली न समझें क्यों कि छोटी सी चोट भी हमेशा के लिए आंखों की दृष्टि को हानि पहुंचा सकती है। ये छोटी-छोटी बातें और जानकारी आंखों के इलाज में मदद करती हैं, जिससे पीडित जल्दी ही ठीक हो सकता है। ये याद रखिए कि आंखें भगवान का अमूल्य उपहार हैं और उनका ख्याल रखना हमारा परम कर्तव्य है। आंख संबंधी किसी भी समस्या को सुलझाने के लिए डाक्टर से तुरंत संपर्क करें।
अस्थमा रोगी भी रहें सावधान दिवाली अस्थमा और एलर्जी से पीड़ित लोगों के लिए मुसीबत भरा साबित हो सकता है। घर की साफ-सफाई से धूल और गंदगी, पटाखों और दीए का धुआं प्रदूषण और साथ में ठंड बढ़ने से अस्थमा पीड़ितों को मुसीबतों का सामना करना पढ़ सकता है और अटैक की आशंका भी अधिक हो जाती है। इसीलिए जरुरी है की अस्थमा रोगी फ्लू वक्सीनेशन लगवा ले और इनहेलर आसपास ही रखे। आप अपने प्रियेजनो की मुस्कराहट बनाये रखने के कुछ आसान बातो का ध्यान रखते हुए दुर्घटना होने से रोक सकते हैं। पटाखे छोड़ने से पहले खुली जगह तलाश लें। पटाखे हमेशा अच्छे ब्रैंड के ही खरीदें। कुछ लोग घर पर अनार और अन्य पटाखे बनाकर मार्किट में बेचते हैं। जिसमे बारुद्ध में कम कागज लपेटा होता है, ऐसे पटाखे अक्सर दुर्घटना का कारण बनते हैं। वही पटाखे खरीदें, जो बच्चों की उम्र के अनुकूल हों। पटाखे छुड़ाते समय बच्चों के साथ रहें और उन्हें पटाखे चलाने का सुरक्षित तरीका बताएं। पटाखे जलाने के लिए मोमबत्ती या लंबी लकड़ी, अगरबत्ती का इस्तेमाल करें। माचिस से आग लगाना खतरनाक हो सकता है। हवा वाले पटाखे जैसे रॉकिट वगैरह छोड़ते समय इस बात का ध्यान रखें कि उसकी दिशा सही हो। दीवाली की रात को घर की सभी खिड़कियां बंद कर दें, वरना खिड़की से अंदर आकर कोई पटाखा घर में आग लगा सकता है।

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