कोलंबो | एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूह ने श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिघे से सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गैरकानूनी रूप से बल प्रयोग रोकने का अनुरोध किया।साथ ही उसने शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई के दौरान मानवाधिकारों के उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाने का भी अनुरोध किया। ''ह्यूमन राइट्स वॉच द्बारा जारी एक बयान के अनुसार, श्रीलंकाई सुरक्षाबलों ने राष्ट्रपति सचिवालय के निकट प्रदर्शन स्थल पर लोगों को शुक्रवार को बलपूर्वक खदेड़ दिया और प्रदर्शनकारियों पर कथित तौर पर हिसा की, जिसमें 50से अधिक लोग घायल हो गए।

गाले फ़ेस प्रदर्शन स्थल पर हुई इस घटना में कम से कम नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया। गाले फ़ेस में कई अहम सरकारी कार्यालय स्थित हैं।मानवाधिकार समूह ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, ''21 जुलाई को पदभार संभालने वाले विक्रमसिघे को सुरक्षाबलों को तत्काल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गैरकानूनी रूप से बल प्रयोग करने से रोकने, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए सभी लोगों को रिहा करने और मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जिम्मेदार लोगों पर मुकदमा चलाने का आदेश देना चाहिए।
समूह ने संकट की इस घड़ी में कर्ज के बोझ तले दबे देश की मदद कर रही विदेशी सरकारों और बहुपक्षीय एजेंसियों को नयी सरकार पर यह दबाव डालने का भी अनुरोध किया कि वह मानवाधिकारों का सम्मान करें।

'ह्यूमन राइट्स वॉच में दक्षिण एशिया की निदेशक मीनाक्षी गांगुली ने कहा, ''पदभार संभालने के महज एक दिन बाद विक्रमसिघे के सामने कोलंबो में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षाबलों द्बारा बर्बर हमला हुआ। इस कदम ने श्रीलंकाई लोगों को खतरनाक संदेश दिया है कि नयी सरकार कानून व्यवस्था के बजाय क्रूर बल प्रयोग के जरिए काम करना चाहती है। गौरतलब है कि अमेरिका, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और कनाडा समेत कई देशों के साथ ही संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ ने भी प्रदर्शन स्थल पर इस कार्रवाई की निदा की है।

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