कोलंबो : श्रीलंका की राजधानी कोलंबो और उसके उपनगरों में ईंधन की कतारें आठ-आठ किलोमीटर तक लंबी हो गई हैं। किसी वाहन को ईंधन प्राप्त करने के लिए न्यूनतम प्रतीक्षा समय चार घंटे है। आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि यह सिलसिला पिछले चार महीनों से चल रहा है और राष्ट्रपति और उनके मंत्रिमंडल के इस्तीफा देने के बावजूद इसके रुकने की संभावना नहीं है।

नंदसेना फर्नांडो राजू (26), जो बिजली का काम करता था लेकिन भीषण आर्थिक संकट के कारण तिपहिया चालक बन गया ने 'यूनीवार्ता को बताया कि वह कोलंबो और उपनगरों में किराए के लिए कालूतारा से यहां आ था लेकिन अब कोलंबो में बारह दिन हो गये यहीं सोता हूं यहीं खाता हूं और यहीं तिपहिया में अपने कपड़े सुखाने के लिए रखता हूं। ''मैं कपड़े का एक सेट और एक तकिया लाया था । मैं पिछले बारह दिनों से तिपहिया पर ही सोता हूं। उसने बताया कि चार महीने पहले वह डेढ लाख रुपय प्रति माह कमा लेता था और अपने पैतृक घर में अपने माता-पिता के साथ आराम से रहता था।

स्कूल के अन्तिम पड़ाव पर। ''मैंने हाउसिग कॉन्ट्रैक्ट लिया और अपनी खुद की कंपनी बनाई मुझे इसे छोड़ना पड़ा क्योंकि बहुत से लोग अपने घरों को बिजली के तार नहीं लगवाना चाहते थे क्यों कि उपकरणों की लागत तेजी से बढè रही थी, उन्होंने कहा कि तारों के लिए उपकरणों का स्टॉक जिसकी कीमत फरवरी में 45 हजार रुपये थी, जून तक बढèकर 96हजार रुपये हो गई। उन्होंने कहा कि लोगों के पास इतनी महंगी चीजों पर खर्च करने के लिए पैसे नहीं हैं। श्रीलंका इन दिनों गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है जिसके चलते खाने पीने चींजे और दवाईयों की कीमतें आसमान छू रहीं है साथ इनकी भारी किल्लत भी हो गयी है।

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