लंदन | ब्रिटेन में सत्तारूढ़ कंजर्वेटिव पार्टी को उपचुनाव में मिली करारी हार के बाद पार्टी नेतृत्व के बीच प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के खिलाफ शनिवार को एक और बगावत शुरू हो गई।जॉनसन को उस समय तीन बड़े झटके लगे, जब उनकी कंजर्वेटिव पार्टी का गढ़ मानी जाने वाली दक्षिण इंग्लैंड की टाइवरटन और होनीटन तथा उत्तरी इंग्लैंड की वेकफील्ड सीट पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद जॉनसन के करीबी और पार्टी के अध्यक्ष ओलीवर डोडेन ने इस्तीफा दे दिया।

अब, मीडिया में आईं खबरों के अनुसार, बोरिस जॉनसन के आलोचक माने जाने वाले पार्टी के दो सांसदों ने कहा है कि वे सत्तारूढ़ पार्टी को चलाने वाली समिति का चुनाव लड़ सकते हैं। उनकी इस घोषणा से जॉनसन के नेतृत्व के सामने एक और चुनौती खड़ी हो गई है। इस महीने की शुरुआत में पेश किए गए अविश्वास प्रस्ताव में जॉनसन (58) की कुर्सी बच गई थी। हालांकि पार्टी के 148 सांसदों ने उन्हें अपदस्थ करने के लिए वोट दिया था। कंजर्वेटिव सांसदों की शक्तिशाली समिति के नियमों के अनुसार जॉनसन को एक साल के लिए किसी भी चुनौती से सुरक्षा मिल गई थी।

हालांकि नॉर्थ वेस्ट लीसेस्टरशर से कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद एंड्रयू ब्रिजेन ने कहा है कि वह कार्यकारी समिति का चुनाव लड़ना चाहते हैं। उन्होंने बीबीसी से कहा कि वह सत्ता परिवर्तन के पक्षधर हैं जो एक और अविश्वास प्रस्ताव होगा। बकिघमशर की वायकॉम्बे सीट से कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद स्टीव बेकर ने भी कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि उनके साथी ''उन्हें सेवा का मौका'' देने पर विचार करेंगे। हालांकि उन्होंने सत्ता परिवर्तन के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की।

रवांडा में राष्ट्रमंडल देशों की सरकारों के प्रमुखों की बैठक से इतर जॉनसन ने संवाददाताओं से कहा कि उन्हें लगता है कि दो सीट पर हुए उपचुनाव में मिली हार के बाद लोग ''मुझे पीटेंगे'', लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की चिता नहीं है कि कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद उन्हें हटाने का षड्यंत्र रच रहे हैं। जॉनसन ने कहा, ''मैं यह नहीं कहूंगा कि ये परिणाम ठीक हैं। हमें सुनना है, सीखना है।''

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