WTO : दक्षिण अफ्रीका ने टीका निर्माण को लेकर डब्ल्यूटीए में हुए समझौते का स्वागत किया

0
2
WTO : दक्षिण अफ्रीका ने टीका निर्माण को लेकर डब्ल्यूटीए में हुए समझौते का स्वागत किया


जोहानिसबर्ग | दक्षिण अफ्रीकी सरकार, स्थानीय टीका निर्माताओं और संगठित श्रमिक क्षेत्र ने विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में हुए उस समझौते का स्वागत किया है, जिसमें कहा गया है कि विकासशील देश पेटेंट धारकों की अनुमति के बिना अपने आप टीकों का निर्माण शुरू कर सकते हैं। दक्षिण अफ्रीका और भारत ने कई अन्य विकासशील देशों के समर्थन से इस संबंध में डब्ल्यूटीओ में एक प्रस्ताव पेश किया था। अक्टूबर 2020में पेश इस प्रस्ताव पर जिनेवा में आयोजित डब्ल्यूटीओ के 12वें मंत्रालयी सम्मेलन में चर्चा की गई।

प्रस्ताव में कोविड-19 महामारी के मद्देनजर विश्व व्यापार संगठन के तहत आने वाले व्यापार-संबंधित बौद्धिक संपदा अधिकार समझौते (ट्रिप्स) के कुछ प्रावधानों में कुछ समय के लिए विशेष छूट देने का अनुरोध किया गया था, ताकि विकासशील देशों में टीका निर्माता पेटेंट धारकों की अनुमति के बिना टीकों का निर्माण कर सकें। प्रस्ताव पेश करने वाले देशों के अथक प्रयासों के एक सप्ताह बाद यह समझौता हुआ है। हालांकि, कुछ विकसित देशों और दवा कंपनियों ने शुरुआत में समझौते की भाषा का विरोध किया था। समझौते पर अंतिम फैसला लेने के लिए वार्ता की खातिर एक और दिन का समय दिया गया था और शुक्रवार को इस पर मुहर लगा दी गई।

दक्षिण अफ्रीका के व्यापार, उद्योग एवं प्रतिस्पर्धा मंत्री इब्राहिम पटेल ने कहा, “यह समझौता दक्षिण अफ्रीका और अफ्रीकी महाद्बीप की नवाचार व उत्पादन क्षमता, दोनों के निर्माण के लिए किए जा रहे व्यापक प्रयासों का हिस्सा है।” उन्होंने कहा, “दक्षिण अफ्रीका में चार टीकों पर काम चल रहा है। हमारा ध्यान अब यह सुनिश्चित करने पर है कि हम अफ्रीकी उत्पादकों के टीकों के लिए वैश्विक खरीदारों को राजी करके मांग को पूरा करें।” दक्षिण अफ्रीका के टीका निर्माताओं ने सर्वसम्मति से शर्तों का स्वागत किया और विश्व व्यापार संगठन में समझौते तक पहुंचने के दृष्टिकोण का समर्थन किया।

दक्षिण अफ्रीकी की टीका निर्माता कंपनी 'बायोवैक' के सीईओ मुरैना मखोआना ने कहा, “यह विकासशील देशों में कोविड रोधी टीके के विकास एवं निर्माण में शामिल सभी संस्थानों के लिए बिना किसी बाधा के काम करने के लिहाज से फायदेमंद साबित होगा।” दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन फ़ेडरेशन ऑफ एसए ट्रेड यूनियंस (सीओएसएटीयू) ने भी समझौते का स्वागत किया। यूनियन ने कहा, “दक्षिण अफ्रीका में सार्वजनिक नीति के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों में काफी प्रगति की गई है।”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here