एक दिन में कोई राफेल नडाल नहीं बना करता, वर्षों की मेहनत और संयमित होकर लाल बजरी में बहाना पड़ता है पसीना

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एक दिन में कोई राफेल नडाल नहीं बना करता, वर्षों की मेहनत और संयमित होकर लाल बजरी में बहाना पड़ता है पसीना

राफेल नडाल एक दिन में तैयार हुआ लाल बजरी का बादशाह नहीं है बल्कि उन्होंने हर दिन बेहतर होने के लिए अभ्यास किया। अनुशासन में रहे और अपना पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ मुकाबले में केंद्रित रखा। उन्हें छोटी-छोटी उपलब्धियों में जश्न नहीं मनाने दिया जाता था और यही कारण है कि आज उनका तूता बोलना है।

राफेल नडाल सबसे उम्रदराज चैंपियन बने हैं। राफेल नडाल ने 19 साल की उम्र में पहली बार फ्रेंच ओपन का खिताब जीता था और अब 36 साल की उम्र में 14वीं बार लाल बजरी पर और 22वें ग्रैंडस्लैम खिताब पर कब्जा कर लिया है। राफेल नडाल ने फ्रेंच ओपन के फाइनल में कैस्पर रूड को 6-3, 6-3, 6-0 से हराकर अपनी बादशाहत कायम रखते हुए 14वीं चैंपियनशिप और कुल मिलाकर 22वां ग्रैंड स्लैम खिताब अपने नाम किया। ये दोनों रिकॉर्ड पहले से ही राफेल नडाल के नाम है।

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चाचा ने राफेल नडाल को तराशा

राफेल नडाल जब तीन साल के थे तो उनके चाचा टोनी ने उनके भीतर की प्रतिभा को पहचाना था। टोनी खुद एक समय में स्पेन के शीर्ष शौकिया खिलाड़ी थे और उन्होंने मानाकोर टेनिस क्लब में सैकड़ों बच्चों को ट्रेनिंग दी थी। टोनी ने राफेल नडाल को एक टेनिस रैकेट भी गिफ्ट किया था। जिसकी मदद से राफेल नडाल ने अकादमी में बचपन में ही अपनी प्रतिभा को निखारने का काम शुरू कर दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक टोनी ने जब राफेल नडाल की तरफ गेंद फेंकी थी तो राफेल नडाल ने गेंद का इंतजार करने की बजाय गेंद के करीब गए और जोर से एक शानदार शॉट मारा।

चाचा टोनी की अकादमी में बहुत सारे बच्चे थे लेकिन राफेल नडाल सबसे अलग थे। उनके भीतर की प्रतिभा को चाचा ने ही तराशा था और उन पर विशेष रूप से ध्यान दिया करते थे। हालांकि राफेल नडाल भी टोनी की निगाह में खरे उतरे।

अपनी आत्मकथा राफा: माई स्टोरी में राफेल नडाल ने लिखा था कि कैसे उन्हें एक बच्चे के रूप में खिताब का जश्न मनाने की अनुमति नहीं थी और उन्हें अपना ध्यान अगले प्रशिक्षण सत्र पर केंद्रित करना पड़ता था। इस दौरान उन्होंने स्वीकार किया था कि वो टोनी से डरते हैं। उन्होंने बताया था कि अभ्यास सत्र के बाद उन्हें लाल बजरी को बराबर करना पड़ता था और शॉट खेली गई सभी गेंदों को इकट्ठा भी करते थे।

राफेल नडाल एक दिन में तैयार हुआ लाल बजरी का बादशाह नहीं है बल्कि उन्होंने हर दिन बेहतर होने के लिए अभ्यास किया। अनुशासन में रहे और अपना पूरा ध्यान सिर्फ और सिर्फ मुकाबले में केंद्रित रखा। उन्हें छोटी-छोटी उपलब्धियों में जश्न नहीं मनाने दिया जाता था और यही कारण है कि आज उनका तूता बोलना है।

14 साल की उम्र तक राफेल नडाल ने कई उपलब्धियां हासिल कर ली थीं। जिसकी बदौलत उन्हें बार्सिलोना में एक टेनिस छात्रवृत्ति अर्जित मिली लेकिन उन्होंने स्पेन के मानकोर में ही रहने का फैसला किया। उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा कि मैं घर नहीं छोड़ना चाहता था और मुझे इस बात की खुशी है।

फुटबॉल खेला करते थे राफेल

राफेल नडाल के एक और चाचा हैं, जो पेशेवर फुटबॉलर हैं और उन्होंने बार्सिलोना के क्लब के लिए भी फुटबॉल खेला है। राफेल के चाचा मिगुएल एंगल नडाल ने उन्हें बचपन में फुटबॉल खेलना सिखाया और राफेल नडाल को फुटबॉल काफी ज्यादा भा गई थी और उन्होंने स्कूल में कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा भी लिया। लेकिन फिर 8 साल की उम्र में चाचा टोनी से ट्रेनिंग तेज कर दी।

जिसके बाद राफेल नडाल ने फुटबॉल छोड़ने और एक पेशेवर टेनिस खिलाड़ी के रूप में अपना करियर बनाने पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया।

कैस्पर रूड ने पहली बार खेला ग्रैंड स्लैम फाइनल

कैस्पर रूड ने पहली बार ग्रैंड स्लैम का फाइनल मुकाबला खेला है। फाइनल में उनका सामना सीधे राफेल नडाल से हुआ। हालांकि कैस्पर रूड ने अपने गुरू से मुकाबला हार गए। जिन्हें लाल बजरी का ‘बादशाह’ कहा जाता है। आठवीं वरीयता प्राप्त कैस्पर रूड 23 साल के हैं और अब तक किसी ग्रैंड स्लैम में चौथे दौर से आगे नहीं पहुंचे थे। उनके पिता 1991 से 2001 तक पेशेवर टेनिस खिलाड़ी थे। कैस्पर रूड ने 2020 की शुरूआत से अब तक क्लेकोर्ट पर 66 मैच और सात खिताब जीते हैं। सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि कैस्पर रूड ने टेनिस की बारीकियों को राफेल नडाल के अकादमी में ही सीखा था और फाइनल में राफेल नडाल को ही उन्होंने चुनौती दी।

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