वाशिगटन : अमेरिका में एक भारतीय नागरिक पर आव्रजन दस्तावेजों में धोखाधड़ी करने और पहचान छिपाने का आरोप लगा है। एक अमेरिकी वकील ने यह जानकारी दी। अमेरिकी अटॉर्नी फिलिप सेलिगर ने बृहस्पतिवार को कहा कि पश्चिम बंगाल के 30 वर्षीय रोहित कुमार पर फर्जी और धोखाधड़ी वाले आव्रजन दस्तावेज जमा करने और पहचान छिपाने के छह-छह आरोप हैं।

आव्रजन दस्तावेज धोखाधड़ी के प्रत्येक जुर्म के लिए 10 साल तक की जेल की सजा और अधिकतम 250,000 अमेरिकी डॉलर के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं, पहचान छिपाने के प्रत्येक मामले में दो साल जेल की सजा दी जाती है। साथ ही अधिकतम 250,000 अमेरिकी डॉलर का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। इस मामले में दायर दस्तावेजों और अदालत में दिए गए बयानों के अनुसार, कुमार ने दुनिया की सबसे बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों में से एक के लिए भारत में कई वर्षों तक काम किया।

दस्तावेजों में कहा गया है कि इस आईटी कंपनी ने एक इलेक्ट्रिक यूटिलिटी कंपनी के साथ अनुबंध किया जो न्यूजर्सी में थी और दक्षिणी न्यूजर्सी सहित कई स्थानों पर परमाणु ऊर्ज़ा केंद्रों का स्वामित्व और संचालन करती थी। अनुबंध के तहत, आईटी कंपनी ने न्यूजर्सी कंपनी को सेवाओं दीं। इन सेवाओं में विशेष व्यवसायों में काम करने वाले भारत से विदेशी नागरिक कामगारों की आपूर्ति भी शामिल थी। कुमार ने एच-1बी वीजा कार्यक्रम के तहत भारतीय नागरिक कामगारों को अमेरिका में प्रवेश कराने और फिर न्यूजर्सी कंपनी में काम की व्यवस्था करने में इनकी मदद की। इनमें से कुछ दक्षिणी न्यूजर्सी में एक परमाणु ऊर्ज़ा संयंत्र में तैनात थे, जबकि अन्य विदेशी कर्मचारी न्यूजर्सी में और उसके आसपास के स्थानों पर तैनात थे।

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