जाने फ्रेंच ओपन का इतिहास, जिसका खिताब जीतना हर खिलाड़ी का सपना होता है

0
3
जाने फ्रेंच ओपन का इतिहास, जिसका खिताब जीतना हर खिलाड़ी का सपना होता है


1975 तक, फ्रेंच ओपन घास पर नहीं खेला जाने वाला एकमात्र बड़ा टूर्नामेंट था। इसका आधिकारिक नाम फ्रेंच लेस इंटरनेशनॉक्स डी फ्रांस डी टेनिस है। हालांकि यह फ्रेंच ओपन या रोलैंड गर्रोस के रूप में लोकप्रिय है। इसकी शुरुआत 1891 में की गई थी।

विश्व के हर कोने में टेनिस की लोकप्रिय है। कुछ टेनिस खिलाड़ियों के नाम तो अब हर किसी के जुबान पर रहते हैं। जैसे कि नोवाक जोकोविच, रोजर फेडरर, राफेल नडाल, मारिया शारापोवा इत्यादि। जैसे क्रिकेट में वर्ल्ड कप होता है, फुटबॉल में फीफा होता है, वैसे ही टेनिस में चार ग्रैंड स्लैम होते हैं। सबसे पुराना विंबलडन, उसके बाद यूएस ओपन आया, तब फ्रेंच ओपन और फिर ऑस्ट्रेलिया ओपन। कुल मिलाकर देखें तो किसी की टेनिस खिलाड़ी के लिए यह सभी ग्रैंड स्लैम जीतना किसी सपने से कम नहीं होता है। वर्तमान में देखें तो फ्रेंच ओपन खेला जा रहा है। आज हम आपको फ्रेंच ओपन के ही बारे में बताने जा रहे हैं। फ्रेंच ओपन टेनिस की महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं में से एक है जो मई के अंत में शुरू होता है और जून के पहले सप्ताह में समाप्त हो जाता है। इसे फ्रांस की राजधानी पेरिस के स्टेड रोलैंड गर्रोस में खेला जाता है। 

इसे भी पढ़ें: ‘काश मैं लड़का बन पाती,’ मैच में पीरियड का दर्द नहीं सहन कर पाई चीन की खिलाड़ी, French Open से हुईं बाहर

1975 तक, फ्रेंच ओपन घास पर नहीं खेला जाने वाला एकमात्र बड़ा टूर्नामेंट था। इसका आधिकारिक नाम फ्रेंच लेस इंटरनेशनॉक्स डी फ्रांस डी टेनिस है। हालांकि यह फ्रेंच ओपन या रोलैंड गर्रोस के रूप में लोकप्रिय है। इसकी शुरुआत 1891 में की गई थी। हालांकि, उस वक्त इस प्रतियोगिता में वही खिलाड़ी भाग ले सकते थे जो फ्रांस क्लब के सदस्य होते थे। इसके तहत पहली बार महिला टूर्नामेंट का आयोजन 1897 में किया गया। 1912 से लेकर 1923 तक यह टूर्नामेंट युद्ध वाले देश को छोड़कर अन्य देशों के मध्य में ही खेला गया था। 1925 से इस फ्रेंच चैंपियनशिप में अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी भाग लेने लगे। धीरे-धीरे इसकी लोकप्रियता बढ़ने लगी। 1912 से लेकर 1923 के दौरान इस टूर्नामेंट के विजेता दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी टोनी विल्डिंग (1913,1914) और बिल टिल्डेन (1921) थे। 1945 आते-आते यह प्रतियोगिता काफी लोकप्रिय हो गया और इसमें कई प्रतिभागी भाग लेने लगे। 

1946 और 1947 में, विंबलडन के बाद फ्रेंच चैंपियनशिप आयोजित की गई, जिससे यह वर्ष का तीसरा ग्रैंड स्लैम इवेंट बन गया। 1968 में यह ऐसा पहला ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट बन गया जिसमें पेशेवर और नौसिखिये दोनों भाग ले सकते थे। 1981 के बाद से, नए पुरस्कार प्रस्तुत किए गए हैं: प्रिक्स ऑरेंज (सर्वश्रेष्ठ खेल-कूद और प्रेस के साथ सहयोगात्मक रवैये का प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी के लिए), प्रिक्स साइट्रॉन (सबसे मजबूत चरित्र और व्यक्तित्व वाले खिलाड़ी के लिए) और प्रिक्स बोर्जियन (टेनिस के लिए) वर्ष का खिलाड़ी रहस्योद्घाटन)। 2006 के बाद से टूर्नामेंट रविवार को ही शुरू होता है। इसकी विशेषता यह है कि तीन मुख्य कोर्ट पर 12 सिंगल्स मुकाबले खेले जाते हैं। 2007 के बाद पहली बार इस प्रतियोगिता में सभी राउंड्स के लिए महिलाओं और पुरुषों दोनों को समान पुरस्कार राशि प्रदान कराई जा रही है। 

इसे भी पढ़ें: विंबलडन टूर्नामेंट में नहीं खेलेंगे रूस और बेलारूस के खिलाड़ी, नडाल और जोकोविच ने की आलोचना

1953 से विजेताओं को ट्रॉफी प्रदान की जा रही है। पेरिस के एक प्रसिद्ध ज्वेलरी हाउस, मेलरियो डिट्स मेलर द्वारा इसे निर्मित किया जाता हैं। महिला एकल के विजेता को प्रदान की जाने वाली ट्रॉफी को 1979 से कूप सुज़ैन लेंग्लेन (सुज़ैन लेंग्लेन कप) कहा जाता है। वर्तमान कप को पहली बार 1986 में प्रदान किया गया था। 1978 के बाद से फ्रेंच ओपन क्ले कोर्ट पर खेला जाने वाला एकमात्र प्रमुख खेल रहा है, जब यूएस ओपन को हार्ड कोर्ट में बदल दिया गया था। फ्रेंच ओपन को सबसे ज्यादा 13 बार राफेल नडाल ने जीता है। जबकि डबल्स की बात करें तो रोए इमर्शन ने 6 बार जीत हासिल की है। सबसे ज्यादा लगातार इस ट्रॉफी को जीतने वाले खिलाड़ी भी राफेल नडाल ही रहे हैं और उन्होंने 2010 से 2014 तक लगातार पांच बार यह ट्रॉफी हासिल की है। महिलाओं के सिंगल विंस की बात करें तो सबसे ज्यादा बार इस ट्रॉफी को क्रिस इवर्ट ने जीता है। क्रिस इवर्ट ने यह 7 बार जीता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here