भाषा आंदोलन की पहली बुधनी देवी को श्रद्धांजलि देने पहुँचे भाषा आन्दोलन के कार्यकर्ता

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धनबाद/बाघमारा। झारखंडी भाषा संघर्ष समिति के सैकड़ो कार्यकर्ता बुधनी देवी को श्रृद्धांजलि देने उनके आवास मधुबन बस्ती पहुंची। समिति के सदस्य तुलसी महतो ने बुधनी देवी के संघर्ष को नमन किया और उन्हें भाषा आंदोलन के पहले शहीद का दर्जा देने की घोषणा की। समिति के सभी सदस्यों ने बुधनी देवी के सबसे छोटी पुत्रवधु सुनीता देवी से भेंट कर उन्हें सांत्वना दी।
हर सम्भव उन्हें मदद करने का भरोसा दिया। बुधनी के पुत्रवधु ने बताया कि बुधनी देवी भाषा आंदोलन में बद चढ़ कर हिस्सा लिया और अपने गांव को जागरूक करने में काफी योगदान दिया। बुधनी देवी पूरे मधुबन बस्ती और आस -पास के इलाकों में अपने द्वारा किये गये सामाजिक कार्यों के लिये जानी जाती थी उन्होंने समाज में नशा उन्मूलन, जुवा ओर महिला शशक्तिकरण के लिये जागरूकता के लिये जानी जाती थी। वो अपने पारम्परिक गीतों से लोंगो को जागृत करती थी। भाषा आंदोलन में भी वही जज्बा उनमें देखा गया और अपने गीतों के द्वारा वो अपने लोगों उनके हक ओर अधिकारों के लिये जागृत करती थी।

सुनीता देवी के अनुसार 30 जनवरी को झारखंडी भाषा संघर्ष समिति के द्वारा आयोजित मानव श्रृंखला में बुधनी देवी ने हिस्सा लिया और उसी रात उनकी तबियत अचानक खराब हो जाने के कारण 75 वें वर्ष की आयु में उनकी मृत्यु हो गई। सुनीता देवी के अनुसार अंतिम क्षणों में भी वो भाषा आंदोलन की ही बात कर रही थी। और खुद सुनीता देवी ने भी कहा ये आंदोलन रुकना नही चाहिये हम ओर भी बलिदान देने को तैयार है, लेकिन अपना अधिकार और अपने बच्चों के भविष्य से कोई समझौता नही कर सकते हैं, ये कहते कहते रोने लगती है। उनके आंसू देख समिति के युवा भी अपने आप को रोक नही पाते है और उनकी भी आंखे गीली हो जाती है। और सब कोई बुधनी देवी अमर रहे अमर रहे का नारा लगाने लगते है। इसी क्रम में समिति के सदस्य राजेन्द्र महतो ने कहा पूर्णिमा नीरज सिंह के वक्तव्य से झरिया विधान सभा ओर झारखंड की जनता काफी आक्रोश में है।

इसका जवाब समिति के कार्यकर्ता ओर यंहा की जनता मशाल जुलुस निकाल कर देगी। इस जुलूस में धनबाद बोकारो के कार्यकता भी शामिल होंगें। करीब हजारों संख्या में लोग जोड़ापोखर के पीला मैदान में कल शाम 4 बजे 3 फरवरी को एकत्रित होंगें ओर ये जुलूस भौंरा तक जायेगी और पूर्णिमा नीरज सिंह और हेमन्त सोरेन का पुतला दहन करेगी। राजेन्द्र महतो के अनुसार ये वही पूर्णिमा नीरज सिंह है। जो हमारे करम आदि त्योहारों में यंहा के मूलवासी आदिवासीयों के साथ -साथ होने का ढोंग कर उनके हक और अधिकारों की रक्षा की बात किया करती थी। हांथ जोड़ कर वोट मांगा था और यहां के लोगों ने दया भावना रखते हुए यहां की जनता ने झरिया विधान सभा की सीट इनके नाम किया था। मगर इसबार इनको करारा जवाब मिलेगा और यंहा की जनता इन्हें घर बिठाने का काम करेगी। झारखंडी भाषा संघर्ष समिति के सदस्यों में राजेंद्र महतो, तुलसी महतो, अजित महतो, शक्ति महतो, मिथलेश महतो, राजा दास, दिलीप महतो, महेंद्र महतो, सूरज महतो, अरबिंद महतो, गौतम महतो, अखिलेश महतो, सुभाष महतो मौजूद थें।

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