देवघर। 30.01.2022 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर स्पर्श कुष्ठ दिवस पर स्पर्श कुष्ठ जागरूकता एवं एनटीडी जागरूकता अभियान, 2022 का विधिवत उद्घाटन प्रशिक्षु आईएएस अनिकेत सच्चन द्वारा किया गया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर मार्ल्यापण करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु आईएएस अनिकेत सच्चान द्वारा कहा गया कि कुष्ठरोग कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। बल्कि छह से 12 महीने के नियमित इलाज से कुष्ठ रोग को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। इसके अलावे उन्होंने जानकारी दी कि जिले में कुष्ठ रोग के प्रति जागरूक करने के लिए 30 जनवरी से विशेष अभियान की शुरूआत की जा रही है। जो कि आगामी 13.02.2022 तक चलाया जाएगा।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज भी समाज में कुष्ठ रोग को लेकर अनेक तरह की शंकाएं है, जबकि यह एक तरह की बीमारी है। जो समय और सही इलाज से पूरी तरह से ठीक हो सकती है। हमारा शरीर भिन्न संक्रमण को भिन्न प्रकार से प्रत्युत करता है। यह एक व्यक्तिगत क्षमता है। जो बीमारी या संक्रमण का प्रतिरोध करती है। जिसे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के नाम से जाना जाता है। दूसरी बीमारी की भांति कुष्ठरोग का कारण जीवाणु है, जो कि माईक्रो बैक्टिरीयम लैपर के नाम से जाना जाता है।
इसके अलावे प्रशिक्षु आईएएस ने कहा कि देवघर जिले को कुष्ठ रोग मुक्त बनाने के लिए 30 जनवरी से 13 फरवरी तक स्पर्श कुष्ठ जागरूकता अभियान चलाया जाना है। इसको लेकर हम सभी का यह प्रयास रहेगा कि कुष्ठ रोग को लेकर फैली भ्रांतियों को प्रचार-प्रसार के माध्यम से दूर किया जाएगा। साथ ही कुष्ठ रोगियों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा मिलने वाली सुविधाओं की विस्तृत जानकारियां सभी को दी जाएगी। कुष्ठ जागरूकता कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षु आईएएस ने कुष्ठ रोग से ग्रसित मरीजों से मुलाकात कर उनका हाल-चाल जाना। इसके अलावे काली रेखा मातृ कॉलोनी में कुष्ठ पड़ित मरीजों के बीच जाकर एम0सी0आर0 चप्पल का वितरण किया। इसके अलावे कार्यक्रम के पश्चात प्रशिक्षु आईएएस अनिकेत सच्चन ने कुष्ठ आश्रम का निरीक्षण कर परिसर के अंदर साफ-सफाई एव मरीजों के स्वास्थ्य हेतु माहौल को और भी बेहतर बनाने का निदेश संबंधित अधिकारी को दिया।

विश्व एनटीडी दिवस के अवसर पर सिविल सर्जन डॉ० सी० के० शाही द्वारा जानकारी दिया गया कि एनटीडी (नेग्लेक्टेड ट्रॉपिकल डिजीजेज) जीवन को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाले रोगों का एक समूह है। जिसके तहत लिम्फैटिक फाइलेरिया (हाथीपांव) विसेरल लीशमैनियासिस (कालाजार), लेप्रोसी (कुष्ठरोग), डेंगू, चिकुनगुनिया, सर्पदंश, रेबीज जैसे रोग शामिल हैं। इन सभी का रोकथाम व इलाज संभव है। बस जरूरत है जागरूक रहने और सही समय पर इलाज।
इसके अलावा कार्यक्रम के दौरान जिला जनसम्पर्क पदाधिकारी रवि कुमार, सदर अस्पताल के चिकित्सक एवं स्वास्थ्य कर्मी आदि उपस्थित थे।

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